लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में मंगलवार को भाजपा और राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण में शामिल “सनातन-विरोधी गिरोह” की गहन जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे से शुरू हुई चर्चा अब चंदे, जमीन और अरबों रुपये मूल्य की श्रीराम शिलाओं के कथित रूप से गायब होने तक पहुंच गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “भाजपाइयों के गैर-पंजीकृत भूमिगत संगी-साथियों की केवाईसी करवाई जाए।”
सपा प्रमुख ने इस मामले को “महापाप” और “महाघोटाला” बताते हुए कहा कि अयोध्या में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं के पीछे कौन-सा गिरोह सक्रिय है, इसकी निष्पक्ष और गहरी पड़ताल होनी चाहिए।
उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह कार्रवाई Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के अनुरोध पर की गई है। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि 7 जून को अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर को दान के रूप में मिली करोड़ों रुपये की राशि का हिसाब स्पष्ट नहीं है। उन्होंने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की भी मांग की थी।
