नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बीच विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ, जिसके बाद सभापति ने टिप्पणी के विवादित हिस्से को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।
चर्चा के दौरान खरगे ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक की घटनाओं और शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है और शिक्षा क्षेत्र में पर्याप्त निवेश होना चाहिए। इसी क्रम में मनुस्मृति और पाठ्यक्रम को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सदन में दिए जाने वाले बयान तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने संबंधित टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए प्रमाण प्रस्तुत करने की बात कही। इसके बाद भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया।
वहीं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सत्ता पक्ष के तर्कों का जवाब देते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिससे कुछ समय के लिए सदन का माहौल गर्म हो गया।
मामले को बढ़ता देख सभापति ने हस्तक्षेप किया और मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी के विवादित हिस्से को राज्यसभा की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ी।
