नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ FIR दर्ज कर स्वतंत्र जांच कराने और मामले की पड़ताल CBI की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (SIT) से कराने की मांग की गई है।
गुरुवार को यह मामला न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को 29 जून को मामले का पुनः उल्लेख करने की अनुमति दी।
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट के प्रशासन और वित्तीय कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चंदे की पारदर्शिता सुनिश्चित करना जनहित का विषय है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि याचिका पंजीकृत हो चुकी है और उसमें कोई तकनीकी कमी नहीं है, लेकिन अभी तक सुनवाई की तारीख निर्धारित नहीं की गई है। इस पर पीठ ने कहा कि यदि सभी औपचारिकताएं पूरी हैं तो रजिस्ट्री नियमानुसार मामले को सूचीबद्ध करेगी।
याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दान राशि के प्रबंधन के लिए प्रभावी नियामक, निगरानी और ऑडिट तंत्र विकसित करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि दान राशि से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल ने बिना FIR दर्ज किए जांच प्रक्रिया कैसे शुरू कर दी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इतने संवेदनशील वित्तीय मामले की जांच किसी स्वतंत्र और पेशेवर एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
पहले से गठित है राज्य सरकार की SIT
उल्लेखनीय है कि 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर दान राशि के कथित दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। इस समिति में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। SIT अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप चुकी है, हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
