बिलासपुर | 30 जून 2026
कभी गरीबी, भूख और बेबसी से टूटकर चार बच्चों के साथ आत्महत्या करने तक पहुंच चुकीं पद्मश्री फूलबासन देवी यादव आज देशभर की लाखों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और संघर्ष का प्रतीक बन चुकी हैं। सोमवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित अनौपचारिक संवाद में उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों और सफलता की प्रेरणादायक कहानी साझा की।
स्कूल में साड़ी पहनने पर किया जाता था अपमान
फूलबासन देवी ने बताया कि बचपन में परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि स्कूल जाने के लिए यूनिफॉर्म तक नहीं थी। मजबूरी में साड़ी पहनकर स्कूल जाना पड़ता था, जिस कारण शिक्षक उन्हें कई बार कक्षा से बाहर कर देते थे। किसी तरह पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई हुई, लेकिन गरीबी के कारण आगे की शिक्षा छूट गई। महज 10 वर्ष की उम्र में विवाह और 12 वर्ष में गौना हो गया।
आत्महत्या का फैसला बदला जिंदगी का मोड़
ससुराल में भी गरीबी और अभाव ने पीछा नहीं छोड़ा। बच्चों की भूख और परिवार की बदहाल स्थिति से परेशान होकर एक दिन वे चारों बच्चों को लेकर रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने पहुंच गईं। तभी उनकी दोनों बेटियों ने मां से कहा कि वे अब कभी खाना नहीं मांगेंगी। बेटियों की इस बात ने उनका फैसला बदल दिया और यहीं से उनके संघर्ष और सेवा की नई यात्रा शुरू हुई।
‘एक मुट्ठी चावल और दो रुपये’ से शुरू हुआ आंदोलन
फूलबासन देवी ने महिलाओं को संगठित कर “एक मुट्ठी चावल और दो रुपये” अभियान शुरू किया। आज यह अभियान एक विशाल महिला स्व-सहायता आंदोलन बन चुका है, जिसमें करीब 8 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के खातों में लगभग 95 करोड़ रुपये की सामूहिक बचत है, जिसने हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल दी है।
‘कौन बनेगा करोड़पति’ में जीते 50 लाख
उनके संघर्ष और सामाजिक कार्यों की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। वे ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में हिस्सा लेकर 50 लाख रुपये जीतने में सफल रहीं। इस राशि से उन्होंने राजनांदगांव में एक आश्रम का निर्माण कराया, जहां गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को सहारा दिया जाता है।
पांचवीं तक पढ़ीं, लेकिन IIT की डायरेक्टर मंडल में मिली जिम्मेदारी
सिर्फ पांचवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने वाली फूलबासन देवी आज देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स/डायरेक्टर मंडल से जुड़ी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। देशभर से छात्र-छात्राएं और शोधार्थी उनके पास महिला समूह प्रबंधन, नेतृत्व और सामाजिक विकास के मॉडल को समझने पहुंचते हैं।
125 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान
सामाजिक सेवा, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए फूलबासन देवी यादव को पद्मश्री सहित 125 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
आज भी सादगी भरा जीवन
इतनी उपलब्धियों के बावजूद उनकी जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं आया। वे आज भी साधारण खपरैल वाले घर में रहती हैं। उनके पति चरवाहे हैं और बेटे मजदूरी करते हैं। फूलबासन देवी का कहना है कि “संघर्ष कभी खत्म नहीं होता, बस उसका उद्देश्य बदल जाता है।”
