नई दिल्ली, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के नाम पर देश की सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक धरोहरों में से एक ग्रेट निकोबार द्वीप को बड़े कॉरपोरेट हितों के लिए दांव पर लगा रही है।
राहुल गांधी ने अपनी अंडमान-निकोबार यात्रा पर आधारित एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि ग्रेट निकोबार केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि जैव विविधता, समुद्री पारिस्थितिकी और आदिवासी संस्कृति का अनमोल खजाना है। उन्होंने दावा किया कि परियोजना के लिए लाखों पेड़ों की कटाई, प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) को नुकसान और स्थानीय समुदायों के विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि सरकार का उद्देश्य वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है तो वह INS Baaz का विस्तार करे, जिसका कांग्रेस पूरा समर्थन करेगी। राहुल गांधी का दावा है कि नौसेना लंबे समय से इस दिशा में मांग करती रही है, लेकिन सरकार ने उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परियोजना से आदिवासी समुदायों, स्थानीय निवासियों और पूर्व सैनिकों की जमीन प्रभावित होगी। राहुल गांधी ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता जो पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की कीमत पर हो।
राहुल गांधी ने सुझाव दिया कि ग्रेट निकोबार को दुनिया के सबसे बेहतरीन और टिकाऊ पर्यटन स्थलों में विकसित किया जा सकता है, जहां पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से परियोजना की समीक्षा करने, सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ने की मांग की।
इस बीच कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने भी ग्रेट निकोबार परियोजना को “पारिस्थितिक आपदा” करार देते हुए कहा कि पर्यावरणीय मंजूरियां कई गंभीर सवालों के घेरे में हैं और सरकार को इस पूरे मामले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और सामरिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों के खिलाफ बताते हुए बड़ा मुद्दा बना रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति और पर्यावरणीय विमर्श के केंद्र में रहने की संभावना है।
