बिलासपुर। जिले में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों को लेकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद हजारों लोगों की चिंता बढ़ गई है। शासन के नए निर्देशों के अनुसार अब केवल ऑनलाइन उपलब्ध जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र ही वैध माने जाएंगे। पहले जारी किए गए मैनुअल प्रमाण पत्रों की मान्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे जिले के करीब 60 हजार से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 से 2022 के बीच जारी कई प्रमाण पत्र अलग-अलग सरकारी पोर्टलों में दर्ज किए गए थे। इनमें 2016 से 2020 तथा 2021-22 के रिकॉर्ड भी शामिल हैं। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा संबंधित पुराने पोर्टलों को बंद किए जाने के कारण इन दस्तावेजों के सत्यापन और ऑनलाइन उपलब्धता में गंभीर दिक्कतें सामने आ रही हैं।
इस नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिन्हें शिक्षा, नौकरी, बैंकिंग, संपत्ति हस्तांतरण, पेंशन या अन्य सरकारी कार्यों के लिए पुराने जन्म अथवा मृत्यु प्रमाण पत्रों की आवश्यकता है। ऐसे कई नागरिकों के प्रमाण पत्र फिलहाल ऑनलाइन सिस्टम में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उनके जरूरी कार्य अटकने की आशंका है।
पहले व्यवस्था यह थी कि यदि किसी व्यक्ति के पास मैनुअल प्रमाण पत्र होता था तो संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार दस्तावेजों की जांच कर उसे ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज कर मान्य कर देते थे। लेकिन अब ऑनलाइन पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया का अधिकार केवल जिला पंजीयक के पास रहेगा। इससे कार्यों में देरी और लंबित मामलों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बंद हो चुके पोर्टलों के रिकॉर्ड को नए सिस्टम में स्थानांतरित कर प्रभावित नागरिकों को राहत पहुंचाने की है। वहीं आम लोगों की मांग है कि पुराने प्रमाण पत्रों के सत्यापन और ऑनलाइन अपडेट के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
