बिलासपुर। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए मिलने वाले सरकारी राशन की पात्रता को लेकर जिले में डेटा जांच के दौरान कई सवाल सामने आए हैं। विभागीय स्तर पर करीब 70 हजार ऐसे हितग्राहियों के मामले सामने आने की बात कही जा रही है, जिनकी पात्रता संदिग्ध मानी जा रही है। हालांकि, इन मामलों में अंतिम निर्णय स्थानीय स्तर पर होने वाले भौतिक सत्यापन के बाद ही लिया जाएगा।
जांच के दौरान एक अहम चुनौती ऐसे परिवारों को लेकर सामने आ रही है, जिनमें कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, लेकिन उसका नाम राशन कार्ड में दर्ज नहीं है। कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारी परिवार के राशन कार्ड में अपना नाम या आधार विवरण दर्ज नहीं कराता, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से राशन का लाभ लिया जाता है।
आधार लिंकिंग से हर मामले की पहचान संभव नहीं
राशन वितरण व्यवस्था में आधार आधारित सत्यापन से कार्ड में दर्ज सदस्यों की पहचान की जाती है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति का नाम ही राशन कार्ड में दर्ज नहीं है, तो केवल आधार आधारित जांच के जरिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि वह व्यक्ति संबंधित परिवार का सदस्य है और उसकी आय या नौकरी की स्थिति क्या है।
ऐसे मामलों में राशन कार्ड के रिकॉर्ड का सरकारी कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, आयकर संबंधी जानकारी और अन्य उपलब्ध सरकारी डेटाबेस से मिलान किया जा सकता है। इससे संदिग्ध मामलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद मिल सकती है।
नाम दर्ज नहीं होने से अपने आप नहीं माना जाएगा अपात्र
किसी व्यक्ति का नाम राशन कार्ड में दर्ज नहीं होना मात्र इस आधार पर यह साबित नहीं करता कि परिवार ने नियमों का उल्लंघन करते हुए सरकारी राशन लिया है। परिवार की वास्तविक संरचना, आय, रोजगार और संबंधित योजना के पात्रता नियमों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
यदि जांच में यह सामने आता है कि पात्रता से बाहर रहने वाला व्यक्ति जानबूझकर राशन कार्ड में शामिल नहीं हुआ और उसके परिवार के माध्यम से सरकारी राशन का लाभ लिया जाता रहा, तो ऐसे मामलों को मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था से पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भौतिक सत्यापन के बाद साफ होगी तस्वीर
संदिग्ध राशन कार्डों का अब स्थानीय स्तर पर सत्यापन किया जाना है। इस दौरान परिवार में रहने वाले सदस्यों की संख्या, रोजगार, आय और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
भौतिक सत्यापन और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित परिवार सरकारी राशन योजना के लिए पात्र है या नहीं।
विभागीय रिकॉर्ड मिलान पर जोर
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में किसी व्यक्ति का नाम राशन कार्ड में दर्ज नहीं है और उसका आधार भी कार्ड से लिंक नहीं है, वहां केवल ऑनलाइन डेटा के आधार पर निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। ऐसे मामलों में मैदानी सत्यापन के साथ दूसरे सरकारी रिकॉर्ड का मिलान जरूरी होगा।
फिलहाल करीब 70 हजार संदिग्ध मामलों की पहचान को अंतिम अपात्रता नहीं माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक संख्या और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।