रायपुर। बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में अब अगली बड़ी कानूनी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होगी। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत द्वारा 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेज दिया गया है। यह मामला अब डेथ रेफरेंस के तौर पर हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ट्रायल कोर्ट के फैसले की न्यायिक समीक्षा करेगी। इस दौरान निचली अदालत के रिकॉर्ड, दोषसिद्धि के आधार, गवाहों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं की जांच की जाएगी।
हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही लागू होगी फांसी की सजा
कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना अंतिम नहीं मानी जाती। इसलिए अब 10 दोषियों को दी गई फांसी की सजा पर अंतिम न्यायिक निर्णय हाईकोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
दोषियों के पास हाईकोर्ट में अपने खिलाफ आए फैसले को चुनौती देने और अपील करने का कानूनी अधिकार भी है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को नक्सलियों ने निशाना बनाया था। हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। इस घटना को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है।
करीब 13 साल तक चले मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर 2026 को सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
अब इस मामले की अगली अहम कड़ी हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा है। हाईकोर्ट के समक्ष ट्रायल कोर्ट के पूरे रिकॉर्ड और साक्ष्यों की जांच के बाद आगे का फैसला तय होगा।
